केयर सीएचएल हॉस्पिटल में दुर्लभ किडनी कैंसर सर्जरी सफल
इंदौर। केयर सीएचएल हॉस्पिटल में 65 वर्षीय मरीज के किडनी कैंसर की एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मरीज के दाएं गुर्दे में करीब 2.5 किलोग्राम वजन की बड़ी कैंसरयुक्त गांठ थी, जो खून की बड़ी नली (आईवीसी) से होते हुए फेफड़ों की रक्त वाहिका (पल्मोनरी आर्टरी) तक ट्यूमर के रूप में फैल गई थी। इस तरह का कैंसर का फैलाव गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।
मरीज को पिछले दो माह से खांसी, सांस लेने में तकलीफ और कमर दर्द की शिकायत थी। केयर सीएचएल हॉस्पिटल में सीटी स्कैन और इको जांच से इस जटिल बीमारी का निदान हो पाया। गुर्दे का कैंसर सभी कैंसर मामलों में लगभग 4 प्रतिशत पाया जाता है, जबकि गुर्दे के ट्यूमर से फेफड़ों की नसों में ट्यूमर फैलना केवल 2–3 प्रतिशत मरीजों में देखा जाता है।
मरीज की जटिल स्थिति को देखते हुए यूरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ जुल्का और कार्डियक सर्जन डॉ. मनीष पोरवाल की टीम ने संयुक्त रूप से सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान दाईं किडनी में मौजूद करीब 2.5 किलोग्राम की कैंसरयुक्त गांठ के साथ उससे जुड़े ट्यूमर को आईवीसी और पल्मोनरी आर्टरी से पूरी तरह निकाल दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को बाईपास मशीन पर लेकर टोटल सर्कुलेटरी अरेस्ट करना पड़ा, जो इस प्रकार की सर्जरी का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण है।
डॉ. सौरभ जुल्का, यूरोलॉजिस्ट ने कहा, “इस मरीज की स्थिति बेहद जटिल थी, क्योंकि किडनी में मौजूद बड़ी कैंसरयुक्त गांठ से निकला ट्यूमर आईवीसी के रास्ते फेफड़ों की रक्त वाहिका तक पहुंच गया था। ऐसे मामलों में कैंसर की गांठ और ट्यूमर को पूरी तरह निकालना बेहद मुश्किल होता है। पूरी टीम के समन्वित प्रयास से हम इसे सफलतापूर्वक कर पाए।”
डॉ. मनीष पोरवाल, कार्डियक सर्जन ने कहा, “इस सर्जरी में कार्डियक सर्जरी और यूरोलॉजी टीम के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी था। ट्यूमर फेफड़ों की रक्त वाहिका तक पहुंच चुका था, इसलिए बाईपास मशीन की सहायता और टोटल सर्कुलेटरी अरेस्ट की आवश्यकता पड़ी। इस दौरान मरीज की सुरक्षा और सर्कुलेशन को नियंत्रित रखना सबसे महत्वपूर्ण था।”
डॉ. विजय महाजन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ने कहा, “टोटल सर्कुलेटरी अरेस्ट के दौरान मरीज की ऑक्सीजन और रक्त संचार को नियंत्रित रखना एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है। टोटल सर्कुलेटरी अरेस्ट के दौरान मरीज का संपूर्ण रक्त प्रवाह रोक दिया जाता है इसके लिए मरीज का बॉडी टेंपरेचर 18 डिग्री किया जाता है ताकि मस्तिष्क में बिना रक्त प्रभाव के कुछ दोष ना आए इस केस में एनेस्थीसिया टीम ने ऑपरेशन के हर चरण में मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी की और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”
डॉ. राजेश कुकरेजा और डॉ. करण पोरवाल ने संयुक्त रूप से कहा, “ऐसे जटिल मामलों में सर्जरी से पहले की तैयारी, ऑपरेशन के दौरान टीम का समन्वय और बाद की निगरानी, तीनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। सर्जरी के बाद की देखभाल भी बेहद अहम है। मरीज को शुरुआत में वेंटिलेटर और आईसीयू सपोर्ट पर रखा गया था। टोटल सर्कुलेटरी अरेस्ट और बाईपास के कारण मस्तिष्क व हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम रहता है, लेकिन इस मामले में ऐसी कोई समस्या नहीं हुई। मरीज ने तेजी से रिकवरी की और 5–6 दिनों में स्वस्थ होकर घर लौट गया। बिना किसी प्रमुख हृदय या न्यूरोलॉजिकल जटिलता के मरीज का डिस्चार्ज होना पूरी टीम के लिए संतोष की बात है।”
केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स के एचसीओओ तारिक़ ताजदार ने कहा, “ऐसे जटिल मामलों में यूरोलॉजी, कार्डियक सर्जरी और एनेस्थीसिया जैसी विशेषज्ञ टीमों के बीच बेहतर समन्वय और हर स्तर पर सावधानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में किडनी से आईवीसी और फेफड़ों की रक्त वाहिका तक फैले ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालना और मरीज का 5–6 दिनों में स्वस्थ होकर घर लौटना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हमारा प्रयास रहता है कि जटिल से जटिल मामलों में भी मरीज को सुरक्षित और बेहतर उपचार मिले।”
इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न करने वाली टीम में डॉ. सौरभ जुल्का, डॉ. मनीष पोरवाल, डॉ. विजय महाजन, डॉ. आशीष जैन, डॉ. राजेश कुकरेजा एवं डॉ. करण पोरवाल सहित अन्य चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ शामिल रहे। संभवतः यह सेंट्रल इंडिया की पहली सफल सर्जरी है।
