November 6, 2026
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यूनिक हॉस्पिटल में दिव्यांग बच्चों के लिए 30 बेड के निःशुल्क विशिष्ट सेवा वार्ड का लोकार्पण

इंदौर। आर्थिक एवं सामाजिक रूप से वंचित दिव्यांग बच्चों के उपचार, पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन दशकों से अधिक समय से चल रहे सेवा अभियान को गुरुवार को एक नई दिशा मिली, जब यूनिक हॉस्पिटल में 30 बेड के निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह – सरकार्यवाह आलोक कुमार के करकमलों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा तिरुपति स्टार्च एंड केमिकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित मोदी ने अध्यक्षता की।

यह विशिष्ट वार्ड यूनिक हॉस्पिटल, नीमा इंस्टीट्यूट फॉर ऑर्थोपेडिक एंड रिहैबिलिटेशन ट्रस्ट तथा आरोग्य भारती इंदौर महानगर के प्रयासों से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि आलोक कुमार ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी संवेदनशीलता और सेवा भावना में निहित होती है। जो समाज अपने सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करता है, वही वास्तव में सशक्त और समृद्ध बनता है। उन्होंने कहा कि यूनिक हॉस्पिटल, आरोग्य भारती और नीमा ट्रस्ट द्वारा स्थापित यह निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण है, जो हजारों दिव्यांग बच्चों के जीवन में आत्मविश्वास, सम्मान और नई संभावनाओं का संचार करेगा।

विशेष अतिथि डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा तभी सार्थक होती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। दिव्यांग बच्चों को समय पर उपचार, सर्जरी और पुनर्वास उपलब्ध कराकर उन्हें स्वावलंबी बनाना एक श्रेष्ठ मानवीय सेवा है। उन्होंने कहा कि वर्षों से चल रहा यह अभियान हजारों परिवारों के जीवन में आशा का संचार कर चुका है और इस नए वार्ड की स्थापना से यह सेवा कार्य और अधिक व्यवस्थित, प्रभावी तथा व्यापक रूप से आगे बढ़ सकेगा।

यूनिक हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रमोद नीमा ने कहा कि चिकित्सा केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को सम्मानपूर्वक बेहतर जीवन जीने का अवसर प्रदान करना भी उसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण अनेक बच्चों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। ऐसे बच्चों और उनके परिवारों के लिए यह 30 बेड का निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड आशा, उपचार और सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

आरोग्य भारती मालवा प्रांत के कार्याध्यक्ष डॉ. लोकेश जोशी ने कहा कि किसी भी संवेदनशील समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों के प्रति कितना उत्तरदायित्व निभाता है। विशेष आवश्यकता वाले एवं दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा, सर्जरी, पुनर्वास और निरंतर देखभाल उपलब्ध कराना केवल स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के निर्माण का संकल्प है।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण वे बच्चे रहे, जिन्होंने कभी दिव्यांगता के कारण चलने-फिरने में कठिनाइयों का सामना किया था, लेकिन उपचार और सर्जरी के बाद आज आत्मविश्वास के साथ मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। लगभग 200 किलोमीटर दूर से तीन दिन पूर्व इंदौर पहुंचे इन बच्चों ने अभ्यास कर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें सराहना मिली।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1991 से चल रहे इस सेवा अभियान के अंतर्गत अब तक मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 30,000 दिव्यांग बच्चों का उपचार किया जा चुका है। इस दौरान आयोजित 548 चिकित्सा शिविरों के माध्यम से बच्चों की पहचान, जांच, सर्जरी, कृत्रिम उपकरण उपलब्ध कराने तथा पुनर्वास जैसी सेवाएं प्रदान की गई हैं। समय पर उपचार प्राप्त कर हजारों बच्चे आज अपने पैरों पर खड़े होकर सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

समारोह में पूजनीय संतजन, विभिन्न सामाजिक एवं सेवा संगठनों के प्रतिनिधि, चिकित्सक, उद्योग जगत से जुड़े गणमान्य नागरिक, आरोग्य भारती के कार्यकर्ता, यूनिक हॉस्पिटल एवं नीमा ट्रस्ट का स्टाफ तथा बड़ी संख्या में समाजसेवी उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं, कार्यकर्ताओं और सेवाभावी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए डॉ के के नीमा ने कहा कि 30 बेड के निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड की स्थापना केवल एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व के अद्वितीय समन्वय का सशक्त उदाहरण है। यह पहल आने वाले वर्षों में हजारों जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई आशा, आत्मविश्वास और सम्मान का संचार करेगी तथा “सेवा परमो धर्मः” की भावना को और अधिक व्यापक बनाएगी।