मेदांता हॉस्पिटल में विशेष ईयूएस वर्कशॉप
चिकित्सा जगत में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच एंडोस्कोपिक तकनीकें लगातार विकसित हो रही हैं। इन नई तकनीकों में से एक है एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के निदान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। इसी आधुनिक तकनीक को प्रैक्टिकल तौर पर समझाने के लिए मेदांता हॉस्पिटल, इंदौर में एक विशेष ईयूएस ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।
यह वर्कशॉप गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे चिकित्सकों, डीएम/ डीएनबी विद्यार्थियों एवं एंडोस्कोपी में रुचि रखने वाले रजिस्ट्रर्ड मेडिकल प्रोफेशनल्स हेतु आयोजित की जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य नैदानिक ज्ञान को सुदृढ़ करते हुए प्रतिभागियों को एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड की तकनीकी समझ प्रदान करना है, जिसमें सिमुलेटेड केस स्टडीज़, प्रायोगिक डेमोंस्ट्रेशन और विशेषज्ञों के साथ संवाद शामिल होगा।
“ईयूएस जैसी तकनीक आज गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के निदान और उपचार के तरीके में बड़ा बदलाव ला रही है। पारंपरिक जांचों की तुलना में यह तकनीक ज़्यादा स्पष्टता और सटीकता प्रदान करती है, जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल पाता है। हमारा प्रयास है कि युवा डॉक्टर इसे सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि लाइव केस और वास्तविक क्लिनिकल परिस्थितियों के माध्यम से समझें, ताकि वे इस तकनीक को सही तरीके से अपनाकर बेहतर फैसले ले सकें।”
यह वर्कशॉप उन डॉक्टरों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो एंडोस्कोपी की नई तकनीकों को करीब से समझना चाहते हैं। इससे उनकी क्लीनिकल स्किल्स और आत्मविश्वास दोनों मज़बूत होंगे।”
ईयूएस एक हाइब्रिड तकनीक है, जिसमें एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड का संयोजन होता है। इसकी मदद से डॉक्टर पाचन तंत्र के अंदर और उसके आस-पास के अंगों को बेहद स्पष्ट और सटीक रूप से देख सकते हैं। यह तकनीक ट्यूमर, गॉल ब्लेडर की पथरी, पैंक्रियास की बीमारियां, लिंफ नोड्स और अन्य जटिल स्थितियों के निदान में बेहद उपयोगी है। पारंपरिक एंडोस्कोपी की तुलना में यह अधिक गहराई और स्पष्टता प्रदान करती है, जिससे न केवल सही निदान संभव होता है बल्कि FNAC और बायोप्सी के लिए सटीक लोकेशन तय करने में भी मदद मिलती है। यही वजह है कि यह तकनीक ऑपरेशन से पहले रोग की स्थिति का सटीक आकलन करने में अहम भूमिका निभाती है।