August 29, 2025
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केयर CHL हॉस्पिटल्स इंदौर ने मध्य भारत की सबसे आधुनिक वेस्टिबुलर लैब लॉन्च की

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में जब हर कोई अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहने लगा है, तब भी कुछ समस्याएं ऐसी हैं जो बार-बार होने के बावजूद नज़रअंदाज़ की जाती हैं। बार-बार चक्कर आना, चलते समय संतुलन बिगड़ना, अचानक गिर जाना, सिर घुमाने पर आंखों के सामने अंधेरा छा जाना या दिशा का भ्रम होना, ये सभी संकेत होते हैं वेस्टिबुलर डिसऑर्डर के, यानी शरीर के संतुलन और दिशा बोध से जुड़ी प्रणाली में गड़बड़ी के। इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स, इंदौर ने एक अत्याधुनिक वेस्टिबुलर लैब की स्थापना की है। इस सुविधा का उद्घाटन 31 जुलाई 2025 को हॉस्पिटल परिसर में किया गया। यह लैब न केवल इंदौर, बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए एक अनूठी और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा के रूप में स्थापित हो रही है।

केयर सीएचएल के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आशीष बागड़ी ने कहा: “हमारे देश में अक्सर स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को या तो सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है या फिर उनका इलाज लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है, जबकि उनकी जड़ कहीं और होती है। वेस्टिबुलर डिसऑर्डर भी ऐसी ही एक जटिल स्थिति है, जिसमें मरीज को बार-बार चक्कर आना, गिरने की प्रवृत्ति या संतुलन में गड़बड़ी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बहुत से लोग इसे कमजोरी, तनाव या उम्र से जुड़ी सामान्य बात मानकर टाल देते हैं, लेकिन समय रहते इसका सटीक निदान और उपचार न किया जाए तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। केयर सीएचएल हॉस्पिटल की नई वेस्टिबुलर लैब इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक सोनगरा ने कहा:

स्वास्थ्य सेवाओं में आज जिस चीज की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, वह है,  सटीक निदान और मरीज़-केंद्रित समाधान। वेस्टिबुलर डिसऑर्डर जैसे रोग अक्सर लंबे समय तक गलत पहचान या अधूरे इलाज के कारण मरीज को परेशान करते रहते हैं। मरीज को चक्कर आना, दिशा भ्रम, सिर घुमाने पर आंखों के सामने धुंध आना जैसी समस्याएं सिर्फ असुविधाजनक नहीं, बल्कि कई बार जानलेवा स्थिति भी बन सकती हैं खासकर बुज़ुर्गों और गिरने की आशंका वाले मरीजों के लिए। “हमारी एडवांस वेस्टिबुलर लैब इस चुनौती का समाधान देने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है। यहां उपलब्ध तकनीक जैसे वीडियो निस्टैग्मोग्राफी (VNG), डायनामिक विजुअल एक्यूटी (DVA) और सब्जेक्टिव विजुअल वर्टिकल (SVV) जैसी जांच पद्धतियां हमें वेस्टिबुलर सिस्टम की कार्यप्रणाली को सूक्ष्मता से समझने में मदद करेंगी। इससे रोग की पहचान न केवल जल्दी होगी, बल्कि इलाज भी वैज्ञानिक तरीके से और परिणामोन्मुख होगा।”

हॉस्पिटल के सीओओ श्री मनीष गुप्ता ने कहा: “इस पहल के तहत केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स ने न्यूरोइक्विलिब्रियम दुनिया की सबसे बड़ी वर्टिगो और डिज़ीनेस क्लीनिक श्रृंखला के साथ साझेदारी की है। इस लैब की एक और विशेषता यह है कि यहां विश्वस्तरीय तकनीक का उपयोग करते हुए व्यक्ति-विशेष पर केंद्रित निदान और इलाज की सुविधा दी जाएगी। अब मरीजों को ऐसे लक्षणों के लिए मेट्रो सिटीज़ या विदेश की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। इंदौर में ही अब एक छत के नीचे उच्च गुणवत्ता की जांच, निदान और रोग-विशेष पर आधारित रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम्स उपलब्ध होंगे। इस वेस्टिबुलर लैब के ज़रिए केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स ने न केवल एक आधुनिक चिकित्सा सुविधा शुरू की है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन को स्थिरता, सुरक्षा और आत्मविश्वास देने का बीड़ा भी उठाया है।