November 28, 2025
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क्रसुला फार्मा ने लॉन्च की भारत की पहली उन्नत क्वांटिकस्फेयर™ तकनीक

क्रसुला फार्मास्यूटिकल्स (Crassula Pharmaceuticals) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंदौर, मध्य प्रदेश में भारत की पहली उन्नत क्वांटिकस्फेयर™ (QuanticSphere™) तकनीक लॉन्च की है, जिसके लिए कंपनी ने पेटेंट भी फाइल कर दिया है। यह तकनीकी नवाचार विशेष रूप से उन मरीजों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है जो लंबे समय से जोड़ों के दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस और कार्टिलेज संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस लॉन्च के दौरान डॉ. प्रमोद नीमा, डॉ. लवलीन गुप्ता, डॉ. ए के द्विवेदी और अमेरिका से अर्तुरो ईडी जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञों ने उपस्थित होकर तकनीक की सराहना की।

तकनीकी दृष्टिकोण से, क्रसुला फार्मा की सीटीओ डॉ. भावना गुप्ता ने स्पष्ट किया कि क्वांटिकस्फेयर™ एक अत्याधुनिक ड्रग डिलीवरी सिस्टम है। अक्सर शरीर में सामान्य सप्लीमेंट्स पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाते, लेकिन इस तकनीक में दवाओं को ‘फॉस्फोलिपिड-आधारित धनात्मक आवेशित नैनो वेसिकल्स’ में सुरक्षित किया जाता है। इन नैनो-कणों की संरचना मानव कोशिका झिल्ली के समान होती है, जिससे दवा पाचन तंत्र के एसिड और एंजाइम्स से खराब हुए बिना सीधे लक्षित कोशिकाओं तक पहुँचती है। यही कारण है कि यह तकनीक दवाओं और पोषक तत्वों (जैसे कुर्कुमिन और कोलेजन) की अवशोषण क्षमता को 90% तक बढ़ाने में सक्षम है।

मरीजों के लिए इसके लाभ व्यापक

नैनो-कणों के माध्यम से दवा तेजी से लक्षित स्थान पर पहुँचती है जिससे जल्दी आराम मिलता है, वहीं इसकी ‘स्लो रिलीज़’ प्रणाली दवा के असर को लंबे समय तक बनाए रखती है, जिससे बार-बार खुराक लेने की आवश्यकता कम हो जाती है। यह तकनीक पूरी तरह से शरीर के अनुकूल है और इससे पेट में जलन, गैस या अपच जैसी समस्याएं नहीं होतीं। यह बिना किसी रासायनिक मिलावट के सुरक्षित रूप से काम करती है, जिससे सूजन कम करने और जोड़ों की मजबूती में सुधार करने में मदद मिलती है।

कंपनी के सीईओ और फाउंडर रूपेश गुप्ता ने इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह तकनीक एथलीट्स, बुजुर्गों और मेनोपॉज़ के बाद की महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। कंपनी जल्द ही इस तकनीक पर आधारित उत्पाद बाजार में लाएगी। वहीं, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रमोद नीमा और चीफ साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. लवलीन गुप्ता ने भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तकनीक न केवल ऑर्थोपेडिक उपचार को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि भविष्य में इसका उपयोग कैंसर और मधुमेह जैसे असाध्य रोगों के इलाज में भी किए जाने की प्रबल संभावना है।